छत्तीसगढ़

एंबुलेंस न मिलने से परिवार को शव छह किलोमीटर खाट पर ले जाना पड़ा, मानवता शर्मसार

Shantanu Roy
12 Dec 2025 11:27 PM IST
एंबुलेंस न मिलने से परिवार को शव छह किलोमीटर खाट पर ले जाना पड़ा, मानवता शर्मसार
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छग
Sukma. सुकमा। छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले में मानवता को शर्मसार करने वाला मामला सामने आया है। जगरगुंडा क्षेत्र के चिमलीपेंटा निवासी 40 वर्षीय बारसे रामेश्वर की तबीयत अचानक बिगड़ गई। परिजन समय पर वाहन उपलब्ध न होने के कारण उन्हें मजबूरन मोटरसाइकिल से जगरगुंडा स्वास्थ्य केंद्र ले जा रहे थे। रास्ते में ही रामेश्वर ने दम तोड़ दिया। परिवार के अनुसार, रामेश्वर के हाथ-पैर में सूजन और पेट दर्द की शिकायत थी। इससे पहले भी वह जगरगुंडा अस्पताल में इलाज करा चुके थे। उनकी मौत के बाद परिजनों ने शव को
एंबुलेंस
से घर तक भेजने की मांग की, लेकिन दो एंबुलेंस चालक बहाने बनाकर पहुंचे नहीं। एक चालक बीमार था और दूसरा छुट्टी पर था। परिवार ने मजबूरन मृतक का शव छह किलोमीटर तक खाट पर ले जाकर घर पहुंचाया। मृतक के भांजे मड़कम हिड़मा ने लल्लूराम डॉट कॉम को घटना की जानकारी दी और कहा कि यह घटना मानवता के लिए कलंक है।

स्थानीय प्रतिक्रिया
जगरगुंडा सरपंच नित्या कोसमा ने कहा कि यह घटना उनके संज्ञान में आई है और यह बहुत ही निंदनीय है। उन्होंने बताया कि अंदरूनी क्षेत्रों में ग्रामीणों के पास आपातकालीन स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी है, जिससे उन्हें कई प्रकार की कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। सरपंच ने कहा कि शासन-प्रशासन द्वारा एंबुलेंस आम लोगों की सेवा के लिए दी जाती है, लेकिन इसके बावजूद इस तरह की घटना सामने आई। उन्होंने शासन से अनुरोध किया कि जगरगुंडा क्षेत्र में स्वास्थ्य सुविधाओं में सुधार किया जाए ताकि ग्रामीणों को इस तरह की परेशानियों का सामना न करना पड़े।

मानवता और प्रशासनिक जिम्मेदारी
विशेषज्ञों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि स्वास्थ्य और आपातकालीन सेवाओं की असुविधा ग्रामीणों के लिए गंभीर खतरा है। यह घटना प्रशासनिक लापरवाही और प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं की कमी को उजागर करती है। स्थानीय लोग भी इस घटना से आहत हैं और मांग कर रहे हैं कि भविष्य में एंबुलेंस और अन्य आपातकालीन सेवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए। ग्रामीणों का कहना है कि इस प्रकार की घटनाएं विश्वास और मानवता दोनों के लिए कलंक हैं।
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